अमेरीका मे सफलता का परचम फहराने वाले एक चालीस वर्षीय भारतीय युवक व उनकी भारतीय मूल की हमसफ़र की सफलता की कहानी

राजस्थान की ग्रामीण पृष्ठ भूमि से उठकर एक साधारण परिवार से आये अमेरीका मे सफलता का परचम फहराने वाले एक चालीस वर्षीय भारतीय युवक व उनकी भारतीय मूल की हमसफ़र की सफलता की कहानी ।
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कोटा सम्भाग मे बांरा जिले मे अटरू क़स्बे के पास आये छोटे से गाँव पान्डूहैली से पढ़ कर ,
अमेरीका पहुँच कर फ़ाइव गायज फ़ूड चैन की न्यूयार्क राज्य स्थित अल्बनी और उसके आसपास दर्जन भर रैस्टोरैन्टस की श्रृंखला चलाने वाले साथ ही वाशिंगटन डी सी मे पाँच सितारा होटल प्रोजेक्ट ला रहे , एक साधारण परिवार से आने वाले श्री तेजराज सिंह हाड़ा और उनकी अर्द्धांगिनी श्री मति सविता राठौड़ की उपलब्धियों की कहानी किसी तिलिस्म से कम नहीं लगति ।
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अमरीका मे जन्मी और पली बढ़ी सविता राठोड. से परिणय सुत्र मे बंध कर श्री तैज राज 2003 मे पच्चीस वर्ष की उम्र मे एक इन्जीनियर की हैसियत से सैनफ्रांसिस्को पहुँच कर नौकरी करने लगे ।
दौनो पति पत्नि अमेरीका जैसी जगह पर अपना गुज़ारा करने हैतु आइ टी कम्पनी मे कार्यरत थे ।
एक दिन एक रैस्टोरैन्ट मे खाना खाते उन्होंने नोटिस किया कि अमेरीकी अधिकतर जंक फ़ूड स्तेमाल करते है .. उन्होंने सौचा क्यूँ ना अपकंट्री साइड पर फ़्रेश फ़ार्म का नान फ़्रोजन फ़ूड सबके सामने तैयार करके खिलाने का काम किया जाये और उन्होंने अपना आइडिया फ़ाइव गायज के साथ शैयर किया और दौनो पति पत्नि ने तय किया कि नौकरी छौड कर धंधा करेंगे ।
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फ़ाइव गायज की नान फ्राजन फ़ूड कानसैप्ट अमेरीका मे इतनी कामयाब हुई कि उसके बहुत सारे रेस्टोरेंट पूरे अमेरीका मे खुलने लगे ।
इस युगल ने इस धंधे मे शरीक होकर सैकड़ों अमरीकी निवासियों को रोजगार दिया और चैन रिटेल की श्रंखला अल्बनी और न्यूयार्क स्टेट मे स्थापित कर दी ।
अब इनकी योजना अमेरीका मे ही पंचतारा होटल श्रंखला स्थापित करने की है जिसकी शुरूआत ये वांशिगटन डी सी मे एक पंचतारा होटल खोल कर कर रहे है ।
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श्री तैज राज सिंह व श्री मति सविता राठोड से मैरी मुलाक़ात मैरे अमेरीका प्रवास के दौरान 2006 मे हुई तब से इनके साथ हमारे पारिवारिक सम्बन्ध है ।
हर वर्ष अमेमरीका से वर्ष मे ये दौ बार अपने गाँव आते है तथा अपने बच्चों को ठैट गाँव की संस्कृति मे सभी जातियों के समन्वय के साथ कैसे रहते है सिखाते है ।
हाल ही मे यह परिवार अपने गाँव आया तो इन्होंने विराट नगर स्थित श्री कैलाश सत्यार्थी जी ( नौबल शांति पुरष्कार से सम्मानित ) के बाल आश्रम बैराठ नगर जाकर वहाँ पर रहने वाले घुमंतु जाति के बालको से मुलाक़ात की ।
भविष्य मे भारत आकर व अमेरीका मे रहकर वे एसे बच्चों को आधुनिक और पारम्परिक शिक्षा से जोड़ने की योजना बना रहे है ताकि ग्रामीण स्तर पर ग़रीब परिवार के बैसहारा स्कूल जाने से वंचित बच्चे आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी बने ।
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आज के दौर मे जब हम भारत मे आरक्षण को क़ायम रखने या उसको हटाने के मुद्दो पर उद्वेलित होकर जातिय दिवारो को खड़ा करके भारत बंन्द तोड़ फोड़ मे मशरूफ है , एसे मेसाधारण परिवार से आने वाले तेजराज जी जैसे युवक हमारे दैश के प्रेरणा स्त्रोत है ।
हम मेहनत और लग्न से अगर अपने आराम के दायरों से परे जाकर अंधेरे कूएँ से बाहर निकल कर सौचे तो सूरज की किरणें और प्रकाश चारों और फैला हुआ है भारत से लैकर अमेरीका तक ।

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