चलन काॅफी कल्चर का

चाय की चुसकियाॅं तो हम सभी ने ली है पर आजकल शहरों में काॅफी  का एक अलग ही कल्चर चल पड़ा है। वैसे तो काॅफी हम पहले से पीते आ रहे हैं पर आज हम जिस काॅफी की बात करने जा रहे हैं वो थोड़ा हटकर है। ऐसे में आज के समय जो काॅफी चलन में वह पहले के मुकाबले से काफी कीमती होती जा रही है। वर्तमान समय में जितनी तेजी से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं उससे भी कहीं तेजी से कॉफ़ी शॉप में काॅफी की कीमतें बढ़ रही हैं। इसे देखकर आप खुद समझ सकते हैं कि आज के दौर में काॅफी कितनी जरूरी हो गई है। देश के बढ़े शहरों में काॅफी का चलन काफी समय से चला आ रहा था पर अब यह धीरे-धीरे और शहरों में भी अपने पावँ पसार रही है। लोगों का कहना है कि काॅफी का चलन अंग्रेज  लेकर आए पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काॅफी हमारे देश में पहले से ही थी अंग्रेजों ने सिर्फ उसे सही रास्ता दिखाया। आज के समय में भारत काॅफी निर्यात करने वाले बड़े देशों में गिना जाना जाता है।

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काॅफी कल्चर के मामले में जयपुर भी पीछे नहीं रहा है। आज के समय में जयपुर में ना-ना करते हुए भी 50 से भी अधिक काॅफी शाॅप खुल चुके हैं। इसके अलावा और भी जगहें हैं जहाँ जाकर भी आप काॅफी पी सकते हो। कहते हैं कि हर किसी काम के पीछे युवाओं का हाथ होता है और इसके पीछे भी युवाओं का ही हाथ है। ये वे जगहें हैं जहाँ नया-नया प्यार पनपता है। ऐसे में युवा काॅफी के बहाने एक से दूसरे से मिलने के लिए इन  काॅफी शाॅप पर जाते हैं और एक-दूसरे पर मनचाहा रूपए उठाते हैं। ऐसा जरूरी नही कि सभी के घरवाले उतने पैसे वाले हो। पर अपने आप को बड़ा दिखाने के लिए जहाँ कहीं से रूपए जुटाते हैं और इन जगहों पर जाते हैं। बात दिन की काॅफी से होते-होते रात के क्लब तक आ जाती है और जब बात को नाईट क्लब की तो इनके बारे में सभी का मालूम है कि का माहौल होता है।

एक होती है बूरी लत, दूसरी होती है अच्छी लत और यह एक अच्छी लत की तरह है जो ऊपर- ऊपर से अच्छी दिखाई देती है पर अन्दर से और भी ज्यादा बुरी होती है। इस तरह की लत किसी के लग जाए तो जिन्दगी नरक बन जाती है। इसलिए हमारा तो यही कहना है कि जितना हो सके काॅफी कल्चर से बचे उतना ही सेहत के लिए लाभदायक साबित होगा । वैसे भी काॅफी के बारे में कहा जाता है कि ज्यादा काॅफी का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक होता है।

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