मोहब्बत के दंगे

जी हाँ, आपने सही सुना है, इन्हे “मोहब्बत के दंगे” ही कहा गया है !!

आप और हम ये देखते है कि आए दिन जाति-धर्म के नाम पर दंगे होते है तो फिर क्यों न “मोहब्बत के दंगे” भी कराए जाए। ऐसे दंगे जिसमे किसी को ये ना पता चले कि वो किस धर्म का है, किस जाति का है क्यों न हम ऐसे दंगे कराये जो हमारे देश एकता और अखंडता को बढ़ावा  दे जो कि हमारे राजनेता नही चाहते है क्यों, न आज हम पार्टीवाद से आगे बढ़ कर सोचे, क्यों न आज हम जाती धर्म पार्टी को भूल कर सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत की बात करे प्यार की बात करे भाईचारे की बात करे। अगर आज हम ने मोहब्बत के दंगे न करवाये तो आने वाली पीढ़ियों के लिए नाइंसाफी होगी, आने वाली नस्लो के साथ एक धोखा होगा जो हम कर रहे है उनके लिए आज हम जो माहौल बना कर जाएंगे, आने वाले बच्चो को उसी हवा में सांस लेना होगा और कल को आप इस हवा को बदल नही पाओगे क्योंकि ये हवा तूफान में बदल गयी होगी और कल को आपके हमारे बच्चो ने पूछ लिया कि आपने हमारे लिए क्या किया है तो सिर झुक जाएगा।

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आज हमारी ताकत नफरतो की ताकत पर भारी पड़ सकती है लेकिन अगर हमने देर की तो कल नफरतो की ताकत हम पर भारी पड़ जाएगी और हम कुछ नही कर पाएंगे। हमारे पास आज एक मौका है कि हम मोहब्बत के दंगे में शामिल होकर हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई भूल कर  भाई-भाई बन जाये और फिर ये नेता कुछ नही कर सकते  है। आप सोचो कि 1.33 अरब की जनसंख्या वाला देश आज किस रास्ते पर चल पड़ा है।  कुछ लोग जिनको उंगलियो पर गिना जा सकता है वो लोग जिस रास्ते पर चाहते है हमे ले जाते है। हम उनके बहकावे में आकर अपने साथ रह रहे किसी भाई को जला कर मार डालते है तो कभी महिलाओ की इज़्ज़त को तार-तार कर देते है क्योंकि मेरे दिमाग मे उन लोगों ने एक ज़हर भर दिया है और हम जानते हुवे भी उस ज़हर के असर को खत्म नही कर रहे है।

आओ, हम सब मिलकर एक कसम खाते है कि हम आपस मे इंसान बन कर रहेंगे।  हम कसम खाते है कि चंद गलत लोगो के बहकावे में आ कर हम देश को रुस्वा नही होने देंगे।  हम अपने देश को उसी गंगा-जमुना तहजीब का प्रतीक बना देंगे जो कभी था हमारा देश आज उस ज़ख़्मी चिड़िया की तरह हो गया है जो चिड़िया जख्मी तो है लेकिन अपना ज़ख्म किसको दिखाए क्योंकि सब तो यहाँ उस चिड़िया को अपनी प्लेट में  रखने की फिराक में है।

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ऐसा नही है कि देश मे सबके सब गलत लोग ही है। आज भी कुछ लोग है जो देश मे एकता चाहते है तो हम उनका साथ देकर उनके कंधे से कंधा मिलाकर अपने देश को क्यों न बचा ले। मेरे भाई आज हम न जागे तो देश सो जाएगा जो दूसरे मुल्क चाहते है हम वही कर देंगे अपने हाथों से हमे मिलकर अपने देश को बचाना है और हम इसके लिए सिर्फ कदम बढ़ा दे फिर देखो नफरत खुद ब खुद दस कदम पीछे भाग जाएगी नफरत आगे इस लिए आ रही है क्योंकि हम मोहब्बत को छुपाये बैठे है। जब हम मोहब्बत को आगे लाएंगे तो नफरत के दम घुट जाएगा। हम अपने नवजवान भाई -बहनों से विनती करते है कि वो इस मोहब्बत के दंगे को समझे और देश की एकता में अपना योगदान दे हम ज़िंदा है तो ज़िंदा दिखाना होगा वरना नफरते हमे मार देगी। मोहब्बत के दन्गे  कोई पार्टी नही कोई संस्था नही है कोई NGO नही है मोहब्बत के दन्गे एक परिवार है जिसमे हर इंसान को बराबरी का हक़ है।

न हिन्दू है, न मुसलामन है, न सिख है, न ईसाई है
सिर्फ एक दूसरे के लिए प्यार है मोहब्बत है भाईचारा है!!

 

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लेखिका- डॉ. सुप्रिया कपुर

5 thoughts on “मोहब्बत के दंगे

  • January 13, 2019 at 12:29 am
    Permalink

    ऐक देश ऐक परिवार 👉 M K D

    Reply
  • January 13, 2019 at 1:57 am
    Permalink

    Hello sir,
    मैं भी समाज के लिए बहुत कुछ करना चाहता हु औऱ कुछ कर भी रहा हु।
    अपलोग बहुत अच्छा काम कर रहे हो।

    Reply
    • January 15, 2019 at 10:38 am
      Permalink

      बहुत शुक्रिया आपका

      हम दुवा करते है कि आप अच्छे काम आगे भी करते रहे
      कभी हमारी ज़रूरत महसूस हो तो बताइएगा हम किस साथ मिलेंगे

      Reply
  • January 13, 2019 at 11:28 am
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    Very good sir 👍 👍 👍

    Reply

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