भारत की शान है, हिन्दु-मुस्लिम एकता- डाॅ सुप्रिया कपूर

कहाॅं जा रहे है हम? आज के हिन्दुस्तान को किसकी नज़र लग गयी है? आज जो हालात है, इसको किसने तैयार किया है? कहीं हम गलत दुश्मन के चक्कर में तो नही है? हमें लगता है कि पाकिस्तान ही हमारी हर परेशानी की वजह है लेकिन शायद कोई और भी है जो हमें पीछे छोड़ना चाहता है। माना कि पाकिस्तान हमारे देश के मुसलमानों को भड़का सकता है उनको आतंकवाद बना सकता है ये मान ले तो फिर हिन्दुओ को आतंकी कौन बना रहा है? क्या अपने आप ये आतंकी बन रहै है? चलो मान लिया कि अपने आप बन रहे है इनको हथियार कौन दे रहा है ? इनके दिल से कानून का डर कौन निकाल रहा है? इनके दिमाग मे इतनी क्रूरता कौन भर रहा है? कोई तो है जो ऐसा करवा रहा है उसे हिन्दू-मुस्लमान से मतलब नही है उसे अराजकता फैलाने से मतलब है।

कहीं इसमे किसी का हाथ तो नही है, हो सकता है कोई  ऐसा भी हो जो हमे अंदर ही अंदर कमज़ोर कर रहा है। हमे अंदर ही अंदर ही खोखला कर रहा है ताकि हमारी कमज़ोरी का फायेदा मिल सके। जब हम सच में कमज़ोर थे तब हमारे पास ऐसी परेशानियां नही थी। तब हमको अपने ही देश मे अपनो से लड़ने की ज़रूरत नही थी लेकिन आज जब हम ताकतवर देशों की लिस्ट में आ चुके है तब हमे अपनो लड़ना पड़ रहा है।

ये कौन नही जानता है कि आज से पहले भी हमे आपस मे लड़ा कर कौन फायेदा ले चुका है। ये सब को पता है कि एक बार ऐसे ही हालात बना कर एक राज्य के राजा को दूसरे राज्य के राजा पर हमला करवाया जाता था और इस तरह से पूरे भारत मे हमे आपस मे लड़ा कर  कब्ज़ा कर लिया गया था। जिसकी वजह से हमे इतने सालों तक गुलाम बने रहना पड़ा और इतनी कुर्बानियो के बाद हम आजाद हुए।

Dr. Supriya Kapoor

तो क्या वो लोग हमें ऐसे ही भूल जाएंगे ऐसे ही छोड़ देंगे क्योंकि वो जानते है कि भारत मे अब राजाहट रही नही। अब एक राजा को दूसरे राजा से कैसे लड़ाया जाए।

लेकिन अब राजा से भी बड़ी चीज है की भारत मे हर धर्म के लोग रहते है जिनको धर्म के नाम पर लड़ाना आम और छोटी सी बात है।सबको पता है कि भारत की पहचान है कि इस देश मे हर धर्म के लोग रहते है हर धर्म के लोगो की इज़्ज़त करना यहाँ के लोगो की पहचान है। हर धर्म की इज़्ज़त करना यहाँ के संविधान में है तो फिर उससे बड़ा हथियार क्या हो सकता है किसी के पास?

कहा जाता है कि किसी को बर्बाद करना है तो उसके सबसे ताकतवर जगह पर वार पहले करो ताकि ज़रूरत पड़ने पर वो हमें उस चीज़ से हरा न सके। क्या आज हमारी सबसे बड़ी ताकत एकता पर वार नही हो रहा है। आज हर गाँव शहर में हमे हिन्दू-मुसलमान के नाम से पहचाना जाने लगा है। आज अखबार में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द बन गया है  हिन्दू-मुसलमान।

आज हम जगह जगह पर हम लड़ रहे है जातिधर्म के नाम से जो हमारे लिए खतरनाक तो है। आने वाली नस्लो के लिए एक श्राप है लड़ हम ज़रूर रहे है लेकिन इसकी सज़ा हमारी आने वाली नस्लो को मिलेगी। अब तो हम इतने आगे निकल गए है कि हमे अदालत कानून जैसे शब्द छोटे दिखने लगे है। अब हम एक आदमी के लिए जो सज़ा का पात्र है उसे बचाने के लिए कभी पुलिस थाने पर कभी न्यायालय पर हमला कर देते है। क्या हमारे दिलों से कानून का डर कानून की इज़्ज़त सब खत्म हो गयी है?  लेकिन क्या हम कभी इतनी हिम्मत इतनी हिमाकत कर सकते थे कि हम जिस देश मे रह रहे है जो हमारी पहचान है हम उस पर हमला करे हम उसका अपमान करे हम उसकी छाती को खून से लाल कर दें।

नही हम ऐसा नही कर सकते थे क्योंकि हम अपने खाने अपने पहनने में अपनी जरूरतों में इतना व्यस्त थे कि हमारे पास इसका समय ही नही था लेकिन आज हमारे पास इसका समय आ जाता है। क्योंकि हमें लगता है कि हमारी पहली ज़रूरत है ये आज हमे अपने परिवार के पालन पोषण की कम और समाज मे अराजकता फैलाने की ज़्यादा चाहत हो गयी है क्योंकि हमें उकसाया जाता है हमे झूठे और बेबुनियादी वीडियो दिखा कर हमारे खून को सफेद किया जाता है। हमे बार बार ये कहा जाता है कि हमारा जन्म हुआ है। अपने धर्म को बचाने के लिए जबकि हम धर्म पर ही नही चल रहे है। धर्म से दूर जाकर हम धर्म के खिलाफ ही लड़ रहे है। तो फिर कोई ताकत तो है जो हमे इस रास्ते पर ला रही है। कोई ताकत तो है जो हमे अपनो के ही खिलाफ खड़ा कर के उसका फायदा ले रही है।

लेकिन हम ये न समझ कर उस ताकत की ताकत बने हुए है जो कि हमारे ही घर मे हमे ज़िंदा जला देने का काम कर रही है।
आखिर किस हद तक हम धर्मिक बनना चाहते है किस हद तक हम धर्म के नाम पर अधर्म का साथ देते रहेंगे। क्या हम कभी वापस आ सकेंगे या नही….लगता तो नही है कि हम वापस आ सकेंगे क्योंकि हम उस रास्ते पर चल पड़े है जिसकी मंजिल सिर्फ तबाही है। सिर्फ बर्बादी है भी मुसलमान अपने आप को दबता समझता है और हथियार उठा लेता है। कभी हिन्दू अपने आप को दबता हुवा समझता है और हथियार उठा लेता है लेकिन ये हथियार हमे अपने हाथों में लेने के लिए उकसाने वाला कौन है। ये हम नही सोचते है हम अपने घर मे अपनो का गला काट देते है दूसरे के उकसाने पर शर्म की बात है।

हमे सोचना चाहिए कि हम कहाँ खड़े है हम उस जमीन पर खड़े है। जिसके नीचे सिर्फ बारूद है और उस बारूद को इस जमीन तक पहुचाने में हमारा भी हाथ है फिर भी इस बारूद के फटने पर हम नही बच पाएंगे क्योंकि हम जिसके उकसाने पर ये कर रहे है। उसे हमसे हमदर्दी नही है उसकी गन्दी निगाह हमारे मुल्क के अमन चैन पर है।

अब भी वक़्त है अपने आप को गलत लोगो से बचा लो और शपथ ले लो कि हम अपने मुल्क को बचाने के लिए हर तरह से तैयार है। हम हिन्दू है मुसलमान है ये नही सोचेंगे हमे ये सोचना है कि हम भारतीय है। हिंदुस्तानी है और इसका कर्ज़ चुकाना है हिन्दुस्तान की मिट्टी तुमसे तुम्हरी जान नही मांग रही है सिर्फ भाईचारा मांग रही है जो हम उसे नही दे पा रहे है। क्योंकि हम स्वार्थी हो चुके है हम भहकावे में आकर अपने घर को अपनो के खून से लाल कर रहे है।

खा गए हो खुद तुम अमन को,
वक़्त है बचा लो अपने वतन को  !!

अतिथि लेखिका- डाॅ सुप्रिया कपूर

8 thoughts on “भारत की शान है, हिन्दु-मुस्लिम एकता- डाॅ सुप्रिया कपूर

  • February 12, 2019 at 12:21 am
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    एक एक बात से सहमत हूँ 100% सहमत

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  • February 12, 2019 at 12:41 am
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    Hamare desh jaisa koi desh nahin. Agree with u totality

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  • February 12, 2019 at 12:46 am
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    बिल्कुल सही लिखा आपने दिल की आवाज़ कलम के जरिये कागज पे उतारी है हम सभी देश वासियों को चाहिए हम आपस मे प्रेम से रहे हम हिन्दू मुस्लिम आपने घर मे रहे ज़ब घर के बाहर निकले तो सिर्फ अच्छे इंसान निकले ताकि इन्सानित जिन्दा रहे. जय हिन्द

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    • February 15, 2019 at 11:35 am
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      हम इंसानों में सिर्फ प्यार ही है इसे जितना हो सके उतना फैलाये

      धन्यवाद !!

      Reply
  • February 13, 2019 at 2:43 pm
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    DR. SUPRIYA KAPOOR,
    You are the Celebrity.
    You are the Writer.
    You are the Inspiration.
    India is great because of daughter like you.
    May I interview you?

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  • February 13, 2019 at 4:25 pm
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    We must think about these facts

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