मोमासर गांव की चारपाई इस वजह है बेहद खास, बनती है कई रंगो में

राजस्थान के सीकर जिले के मोमासर गांव में शेखावाटी मेला काफी प्रसिद्ध है जो हर साल दिसम्बर माह में आता है। इस मेले में हिस्सा लेने के लिए देश से ही नही विदेश से भी कलाकार आते हैं और अपनी कला के रंगों को इस मेले में बिखरते हैं। यह मेला खासतौर पर हस्तशिल्प कलाकारों को समर्पित है। इस मेले में प्रदेश के हस्तशिल्प कलाकार आते हैं और अपनी-अपनी कला को पेश करते हैं। इन कलाकारों में खासतौर पर ऊंट की सजावट करने वाले, पीढ़ा बुनाई वाले, कैलीग्राफी वाले, गोटा पत्ती समेत कई कलाकार आते हैं साथ ही नृत्य व गायन से जुड़े कलाकार भी आते हैं। इस मैले का खास आकर्षण का केन्द्र यहाँ बनाई जानी वाली चारपाई होती है। वैसे चारपाई को भारत में अलग-अलग नामों से जाना जाता है पर लोग इसे खटिया, खाट, पलंग, पल्यं, पर्यक जैसे नामों से भीजानते हैं। भारतीय समाज में चारपाई का इतिहास काफी पुराना है जिसका उपयोग सोने के काम में लिया जाता था। पर आज के समय में लकड़ी के चलन के कारण यह चारपाई धीरे-धीरे समाज से बाहर हो चली है पर आज भी गांव में इसका चलन है।

Jaipur explore momasar village
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पर मोमासर गांव की चारपाई की बात ही कुछ और होती है। इसे बनाने में जरूर समय लगता है पर यह काफी आरामदायक होती है। इस एक चारपाई को बनाने में 2 से 3 दिन लग जाते हैं पर यह निर्भर करता है इसके आकर पर। इसकी खास बात यह है कि इसकी बुनाई करने में जिस धागे का इस्तेमाल किया जाता है। उसे भी पहले अलग से बनाया जाता है। ऐसे में रंगीन चारपाई बनाने के लिए अलग-अलग तरह के रंगों को इसमें मिलाया जाता है। इसके अलावा आप इसे अगल-अलग आकार की आरामदायक कुर्सी भी बना सकते हो। चारपाई को बुनना भी अपने आप में एक कला है। इस कला को सीखने के लिए विदेश से भी लोग यहॉं सीखने आते हैं। ऐसे में अगर आपके घर में भी कोई चारपाई है तो आप उसे फिर से तैयार कर अपने अनुसार न्य रूप देख सकते हो।

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