व्यवस्था में आना लक्ष्य नही, व्यवस्था में खामियों को दूर करना है मुख्य लक्ष्य- नटवर सिंह

किसी महान शक्स ने कहा है ” किसी भी देश की उन्नति और अवनित उस देश में रहने वाले युवाओं के हाथ में होती है।”  इस बात में कोई भी दोराय नही है कि वर्तमान समय में आप अपने आस-पास जो भी बदलाव देख रहे हो। उनमें कहीं न कहीं युवाओं का योगदान रहा है। युवा देश का चेहरा होता है जो देश का नाम ऊँचा उठाता है फिर वह कोई भी क्षेत्र क्यों न हो। अगर बात की जाए राजनीति की तो आज के समय में देश में चारों तरफ युवाओं का ही बोल-बाला है। युवाओं का राजनीति में ज्यादा से ज्यादा आने से हर रोज राजनीति में नई-नई परिभाषा लिखी जा रही है। पर ऐसा संभव नही है कि आप अच्छे हो तो जग भी अच्छा होगा।
अगर बात आती है राजनीति की तो यह अच्छे से अच्छे इंसान को अपने रंग में रंग देती है। ऐसे में समाज के लिए काम करने वाला युवा भी राजनीति के सफेद चोगे तक ही सिमट कर रह जाता है। पर उनमें से कुछ युवा ऐसे भी होते हैं जो निरन्तर देश व समाज की सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे युवा समाज की सेवा करना अपना परम कर्तव्य समझते हैं। कुछ ऐसे ही हैं युवा नेता नटवर सिंह जो अपने कठोर परिश्रम और लोक सेवी कामों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में नटवर सिंह ने जयपुर के आमेर विभानसभा क्षेत्र से निर्दलय नेता के रूप में विधायक पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।
Jaipur Explore Natvar Singh
2006 में नटवर सिंह जयपुर आए और यहाॅं आकर राजस्थान विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। विश्वविद्यालय में आकर जिस तरह का माहौल उन्हें देखने को मिला। इसे देखक़र वह विचलित  हुए। जब कोई छात्र विश्वविद्यालय में मार्कशीट लेने के लिए आता तो उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसमें खासकर उन छात्रों को परेशानी होती जो दूर गावँ में रहने वाले थे। ऐसे में उन्हें अपनी मार्कशीट के लिए महीनों-महीनों तक चक्कर लगाने पड़ते थे। जिससे छात्रों के साथ-साथ उनके परिवारवालों को भी समस्या का सामना करना पड़ता था। इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण मार्कशीट का कम्प्यूटरीकृत न होना था। जिससे मार्कशीट सही समय पर बन नही पाती थी। इसके लिए नटवर सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर आंदोलन किया और छात्रों की हितों को ध्यान में रखा। इसके लिए उन्होंने कई महीनों तक संघर्ष किया और परिणामस्वरूप अंत में प्रशासन को उनकी मांग के आगे झुकना ही पड़ा। जिसके बाद पूरे सिस्टम को कम्प्यूटरीकृत क़र दिया गया। जिसके बाद छात्रों का उनके नेतृत्व पर विश्वास बढ़ा।

2010 में छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू हुए । जिसके बाद समय-समय पर अध्यक्ष बनते रहे। हमेशा से ही छात्रों की हितों के लिए काम करने की लालसा को देखते हुए उन्होनें एबीवीपी से टिकट की मांग की।  एबीवीपी ने नटवर सिंह की मांग को एक सीरे से खारिज कर दिया। इसकी वजह थी कि नटवर सिंह का एक विशेष जाति यानि कि राजपूत जाति से होना। इसके बाद उन्हें  अंदाजा लग गया कि छात्र संघ चुनाव में भी टिकट वितरण जाति को देखकर किए जाते हैं। जिसका खामियाजा एबीवपी को बाद के चुनावों में हार के रूप में देखने को मिला। टिकट वितरण में जिस तरह से व्यक्ति के काम न देखकर जाति को देखा जाता है। यह देख नटवर सिंह को काफी ठेस पहुँची।

जिसके बाद 2014 में नटवर सिंह आमेर (जयपुर ) आए और यहाँ आकर लोगों की समस्याएं देखी तो लगा कि समस्याएं यहाँ भी कम नहीं हैऔर समस्याओं के निवारण के लिए कदम उठाने चाहिए। नटवर सिंह का शुरू से ही यह मानना है ” व्यवस्था में आना उनका लक्ष्य नही है। व्यवस्था में जो खामियाॅं हैं, उन्हें दूर करना उनका लक्ष्य हैं।”  यह सभी को मालूम है कि आमेर, गावँ में बसता है और यहाँ की  प्रमुख समस्या शिक्षा के लिए काॅलेज का न होना साथ ही साथ पक्की सड़कों का न होना। इसके अलावा यहाँ पानी की समस्या आए दिन बनी रहती है। जिसके लिए बिसलपुर के पानी को आमेरवासियों तक पहुँचाना। उनका कहना है ” हर पाँच साल बाद एक नया चेहरा आता है और सिर्फ वादों तक ही सीमित रह जाता है।” ऐसे समय में आमेर को ऐसे चेहरे की तलाश है तो पद के लिए नही लोगों की समस्याओं के लिए काम करे। चुनाव के बारे में नटवर सिंह का कहना है “वह चाहे चुनाव जीते या फिर हारे, उनका काम आमेरवासियों की समस्याओं के लिए लड़ते रहना है। ”

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