नसीरुद्दीन शाह की “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के हक़ को, “विक्रम सिंह धोधलिया” का समर्थन

कहते हैं एक बेहतर समाज के लिए विचारों का आदान-प्रदान होना बेहद जरूरी है। जिससे कई नई तरह की बातें सामने निकलकर आती है जिस पर सोच-विचार कर  उसे और भी बेहतर बनाया जा सकता है । पर आज के समय देश में जिस तरह का माहौल बन रहा है। उसे देखते हुए लगता है कि अपने विचारों को रखना, किसी खतरे से खाली नही है। हाल ही में एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने एक इंटरव्यू में कहा, मैं भारत में अपने बच्चों के लिए डरता हूँ…..। जैसे ही उन्होंने यह बयान दिया उसके तुरन्त बाद ही यह पूरे देश में आग की तरह फैल गया। फिर एक के बाद लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दी। खासतौर पर हमारी मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चौथ स्तम्भ कहा जाता है, ने जिस तरह से इस बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और अपने न्यूज चैनलों में हैडलाइन बनाकर कर दिखाया, जिसे देखने के बाद कोई भी अपनी प्रतिक्रिया दिए बिना रह नहीं पायेगा। ऐसे में जब कोई देश का एक आम नागरिक अपने विचार प्रकट करता है, क्या उसे इतना भी अधिकार नही कि वह देश में चल रहे माहौल पर अपनी बात रख सके। नसीरुद्दीन शाह, भारतीय सिनेमा जगत के बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं जिनका काम ही उनकी पहचान है। ऐसे में देश के अनेक जानी-मानी हस्तियों ने अपनी-अपनी बात रखी और ज्यादातर ने उसका विरोध ही किया।

naseeruddin shah vikram singh dhodhaliy

 

हाल ही में नसीरुद्दीन शाह को अपने बयान के चलते अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल में कड़ा विरोध झेलना पड़ा। इसे देखकर तो यह साफ नजर आता है कि उनकी बात में कहीं न कहीं सच्चाई है। उनके इस बयान ने जब इतना बड़ा बवाल मचा दिया कि उनके यहाँ-वहाँ जाने पर भी लोगों को आपति होने लगी फिर बाकी चीज़ों का क्या ही कहना। देश में जब -जब इस तरह बयान सामने आये हैं इन में सबसे बड़ा अहम रोल आज की मीडिया का रहा है। नसीरुद्दीन शाह के बयान का समर्थन करते हुए  विक्रम सिंह धोधलिया का कहना है कि आजकल जिस तरह की मीडिया काम कर रही है,  यह स्वतंत्र विचारों की ना होकर एक व्यक्ति विशेष, समुदाय और एक विचार की बन कर रह गई है। साथ ही साथ लोगों को भी देश में चल रहे हालात के बारे में समझना चाहिए और पूरी बात जानकर ही अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। अगर किसी ने उनका इंटरव्यू अच्छे से देखा हो तो उसमें उन्होनें सिर्फ अपनी चिंता जाहिर की है जो कि इस देश में रहने वाले हर आम नागरिक का फर्ज है। इस देश की खूबसूरती यही है कि इस देश में किसी के बोलने पर किसी तरह की पाबंदी नही है। पर लोगों से यही उम्मीद करते हैं कृपया इस खूबसूरती को बनाए रखें और किसी के कहने पर नही, खुद उस बात की अच्छे से जाॅच-परख के बाद ही कोई फैसला लें। हमारा सविधान भी हमे अपनी बात कहने का अधिकार देता है।

 

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